भाकृअनुप - केन्द्रीय गोवंश अनुसंधान संस्थान
(आई0 एस0 ओ0 9001:2008 - प्रमाणित संगठन)
   
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केन्द्रीय गोवंश अनुसंधान संस्थान-मेरठ में आपका स्वागत है - मेरठ
डॉ. राजेन्द्र प्रसाद
निदेशक
निदेशक का संदेश
पुरातनकाल से ही भारत मे दुधारू पशुओ का प्रजनन एवं पालन-पोषण परंपरागत तरीके से हो रहा है। गाय को भारतीय संस्कृति में पूजनीय माना जाता है। भारत मे गाय के समान उपयोगी अन्य किसी पशु को नहीं माना जाता। किसानो की समपन्नता का मूल्यांकन गोपशुओ के स्वास्थ्य एवं संख्या से ही आँका जाता रहा है। भारत में गोवंश की संख्या विश्व की कुल संख्या का लगभग 16 प्रतिषत है। हमारा देश कुल दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में पिछले एक दशक से प्रथम स्थान पर है। लेकिन प्रति पशु दुग्ध उत्पादन काफी कम है। पशुओ की उत्पादन क्षमता मूलतः उसकी नस्ल पर निर्भर करती है। 2012 के पशुगणना के अनुसार गोवंश की जनसंख्या लगभग 190.09 मिलियन है।
उसमे से लगभग 33 लाख संकरनस्ल के गोवंश हैं। हमारे देश का कुल दुग्ध उत्पादन 2015-16 में लगभग 155.5 मिलियन मीट्रिक टन था। इस संस्थान द्वारा विभिन्न विकास कार्यक्रमो के माध्यम से देश मे गोवंश की उत्पादकता में सुधार लाने के लिए कार्य किया जा रहा है। संस्थान की परियोजनाओ की विस्तृत जानकारी इस वैबसाइट पर उपलब्ध है। इस वैबसाइट पर उपलब्ध जानकारी छात्रों, योजनाकारों, पशुपालकों एवं विकास कार्यों में लगे हुए लोगों के उपयुक्त सिद्ध हो सकते हैं। जिससे देश में प्रति ब्यात दुग्ध उत्पादकता बढाने में भी सहायक सिद्ध होगी। हमारी वैबसाइट को और अधिक उपयोगी बनाने के लिए कोई उपयोगी सुझाव हो तो हम इसका स्वागत करेंगें।
दूरदृष्टि
उच्च उत्पादकता और लाभप्रदता के लिए गोवंश सुधार।
मिशन (विशेष कार्य)
उत्पादकता और लाभप्रदता को साकार करने के लिए जर्मप्लाज्म सुधार और प्रौद्योगिकी विकास।
अधिदेश
अधिक उत्पादन के लिये संकर नस्ल की गायों के आनुवांशिक सुधार के साथ-साथ एक नई संकर नस्ल फ्रीजवाल को विकसित करना, देशी नस्लों मे दुग्ध उत्पादन एवं भार वाहक क्षमता बढ़ाना तथा संकर सांडो का क्षेत्रीय संतति परीक्षण कर गायों का आनुवांशिक स्तर सुधारना|